डेटा सेंटर दरअसल एक ऐसी जगह हैं जहाँ कई सारे सर्वर्स मौजूद होते हैं जिसमे आपका डेटा स्टोर होता हैं। हर वेब होस्टिंग कंपनी भी अपना सर्वर डेटा सेंटर में ही रखती हैं जो प्राइवेट कंपनियों द्वारा चलाया जाता हैं। हर डेटा सेंटर में एक बेहतरीन कम्प्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद होता हैं जैसे कि सर्वर्स, डेटा स्टोरेज ड्राइव्स, और तमाम नेटवर्क इक्विपमेंट्स। यह फैसिलिटी कंपनियों का डिजिटल डेटा स्टोर करता हैं। इस ब्लॉग में हम इसके बारे में अधिक जानकारी पढ़ेंगे कि डेटा सेंटर क्या हैं, और यह क्यों फायदेमंद हैं?
विषयसूची
डेटा सेंटर का इतिहास
१९४० के दशक में, यूएस मिलिट्री ने एक मशीन तैयार किया था जिसका नाम था Electrical Numerical Integrator and Computer (ENIAC)। यह १९४५ में बनकर तैयार हो चूका था जो एक बुनियादी उदाहरण हैं डेटा सेंटर का। और समय के साथ जैसे जैसे कम्प्यूटर्स साइज़ के हिसाब से विकसित हुआ। और सन १९९० में, माइक्रोकम्प्युटर्स मार्केट में आना शुरू हुए और जल्द ही यह सर्वर के रूप में पहचान बनाने लगे।
२००० के दशक की शुरुआत क्लाउड कम्प्यूटिंग से हुई थी जिसने ट्रेडिशनल डेटा सेंटर की परिभाषा बदल कर रख दी। क्लाउड सेवाएं कंप्यूटिंग संसाधनों को पे-पर-यूज़र मॉडल के तहत सेवाएं प्रदान करती हैं। इसमें यूज़र जितने संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं उतना ही भुगतान करना होगा।
२००६ में, Google ने Dalles, Oregon में पहला हाइपरस्केल डेटा सेंटर लॉन्च किया। यह हाइपरस्केल सुविधा वर्तमान में १३ लाख वर्ग फुट जगह में फैली हुई है और इसमें लगभग २०० डेटा सेंटर ऑपरेटर कार्यरत हैं।
McKinsey & Company के एक रिसर्च के अनुसार, यह उद्योग २०३० तक प्रति वर्ष १०% की दर से बढ़ेगा और नई सुविधाओं के निर्माण पर वैश्विक खर्च $४९ बिलियन तक पहुंच जाएगा।
डेटा सेंटर का क्या काम हैं?
१. डेटा को सुरक्षित तरीके से स्टोर करना
डेटा सेंटर का सबसे मुख्य काम डिजिटल डेटा को सुरक्षित रूप से स्टोर करना होता है। इसमें वेबसाइट का डेटा, ऍप्लिकेशन फाइल्स, ईमेल, इमेज, वीडियो और बिज़नेस से जुड़ी ज़रूरी जानकारी शामिल होती है।
ये डेटा हाई-कैपेसिटी सर्वर्स में रखा जाता है, जहां अनऑथराइज़्ड एक्सेस से बचाने के लिए फायरवॉल, एन्क्रिप्शन और सिक्योरिटी सिस्टम लगाए जाते हैं।
२. वेबसाइट और ऍप्लिकेशन को २४x७ चालू रखना
जब आप कोई वेबसाइट खोलते हैं या मोबाइल ऐप इस्तेमाल करते हैं, तो उसका डेटा डेटा सेंटर से ही लोड होता है। डेटा सेंटर यह सुनिश्चित करता है कि वेबसाइट और ऐप हर समय उपलब्ध रहें।
इसके लिए पावर बैकअप, रेडंडेंट नेटवर्क और ऑटोमेटेड सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है ताकि सर्विस में कोई रुकावट न आए।
३. डेटा प्रोसेसिंग और कंप्यूटिंग
डेटा सेंटर सिर्फ डेटा स्टोर ही नहीं करता, बल्कि उसे प्रोसेस भी करता है। बड़े-बड़े सर्वर यूज़र रिक्वेस्ट को प्रोसेस करके तुरंत रिज़ल्ट देते हैं।
ऑनलाइन पेमेंट, वीडियो स्ट्रीमिंग, सर्च रिज़ल्ट और क्लाउड सॉफ्टवेयर, यह सब इसी प्रोसेसिंग की वजह से तेज़ी से काम करते हैं।
४. बैकअप और डिजास्टर रिकवरी
डेटा सेंटर का एक अहम काम डेटा का बैकअप लेना होता है। अगर कभी सर्वर फेल हो जाए या साइबर अटैक हो जाए, तो बैकअप से डेटा को वापस लाया जा सकता है।
डिजास्टर रिकवरी सिस्टम यह सुनिश्चित करता है कि प्राकृतिक आपदा या तकनीकी समस्या के बाद भी बिज़नेस जल्दी से दोबारा शुरू हो सके।
५. नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी मैनेज करना
डेटा सेंटर हाई-स्पीड इंटरनेट और नेटवर्क कनेक्शन को मैनेज करता है। अलग-अलग ISP और नेटवर्क रूट्स का इस्तेमाल करके तेज़ और स्थिर कनेक्टिविटी दी जाती है।
इससे वेबसाइट की लोडिंग स्पीड बेहतर होती है और यूज़र को बिना किसी रुकावट के सर्विस मिलती है।
६. क्लाउड और डिजिटल सर्विसेस को सपोर्ट करना
आज के समय में क्लाउड कंप्यूटिंग, SaaS टूल्स और AI सर्विसेस डेटा सेंटर पर ही निर्भर करती हैं। डेटा सेंटर इन सभी डिजिटल सेवाओं की रीढ़ होता है।
स्टार्टअप्स से लेकर बड़े एंटरप्राइज़ तक, सभी अपने बिज़नेस ऑपरेशंस को स्केलेबल और किफायती बनाने के लिए डेटा सेंटर का उपयोग करते हैं।
डेटा सेंटर के फायदे

– अवेलिबिलिटी बढ़ाना
डेटा सेंटर में एक दिक्कत रहती हैं, वो हैं अलग अलग एनवायर्नमेंटल टेम्परेचर और ह्यूमिडिटी की वजह से हार्डवेयर का यूसेज ज़्यादा होता हैं और उसके काम करने की क्षमता कम हो जाती। धूल, नमी, और बाकी प्रदूषण डेटा सेंटर की कार्यक्षमता को कम करते हैं। इसलिए मॉडर्न डेटा सेंटर में मौजूद होते हैं तमाम मेंटेनेंस सुविधाएं जिससे डेटा सेंटर के हार्डवेयर का कोई नुक्सान नहीं होता और काफी दिनों तक वह काम करता हैं।
– कार्यक्षमता को बढ़ाना
IT हार्डवेयर जो सिर्फ एक ऑफिस क्यूबिकल तक सिमित हो, उसे मैनेज करना काफी चुनौती भरा रहता हैं। अगर हार्डवेयर इक्विपमेंट्स अगर अलग अलग लोकेशंस पर मौजूद होते हैं। डेटा सेंटर में आपको एक सेंट्रलाइज़्ड फैसिलिटी मिलती हैं जिससे कोई भी टेक्निकल मैनेजमेंट में दिक्कत नहीं होती हैं। डेटा सेंटर में हाई क्वालिटी सर्वर रैक्स एंड कैबिनेट्स होते हैं जिसमे केबल मैनेजमेंट सोल्यूशन के साथ साथ ट्रबलशूटिंग को भी आसान बनाते हैं।
– अधिक सिक्युरिटी
ऑफिस स्पेस में IT संसाधनों को मैनेज करना थोड़ा मुश्किल हैं। वहां आप ज़्यादा सिक्युरिटी फीचर्स नहीं इंस्टॉल कर सकते हैं। बेहतरीन डेटा सेंटर्स जो माइल्सवेब के पास भी हैं वो आपको अच्छे फीचर्स जैसे कि सिक्योरिटी कंट्रोल्स, ज़्यादा बैरियर्स, वीडियो सरवेलिएन्स, और अलार्म सिस्टम्स इंस्टॉल करते हैं।
बैज और स्मार्ट कार्ड रीडर, बायोमेट्रिक स्कैनर और अन्य एक्सेस कंट्रोल सिस्टम फैसिलिटी में प्रवेश करने से रोकते हैं । इसके साथ ही फायर प्रोटेक्शन भी मौजूद होता हैं जो आपदा के समय में काम आता हैं और डेटा सेंटर को सुरक्षित रखता हैं।
– सकेलिबिलिटी और कॉस्ट-एफिशियंसी
अगर आपके IT इक्विपमेंट्स किसी स्टोररूम सिमित हैं तो सकेलिबिलिटी का दिक्कत होता हैं। डेटा सेंटर एक्स्ट्रा कंप्यूट और स्टोरेज कैपेसिटी को संभालने के लिए तेज़ी से स्केल करने के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं। को-लोकेशन डेटा सेंटर ये क्षमताएं बिना अपना खुद का डेटा सेंटर बनाने और चलाने के दिक्कत के प्रदान करते हैं। इन्हें अक्सर मॉड्यूलर डेटा सेंटर कहा जाता है, और कंपनियां बाज़ार में तेज़ी से प्रवेश करने और अधिक तेज़ी से स्केल करने के लिए डेटा सेंटर विकास के लिए प्री-फैब्रिकेटेड तरीकों को तेज़ी से अपना रही हैं।
डेटा सेंटर के प्रकार
१. कोलोकेशन
कोलोकेशन डेटा सेंटर एक प्रकार का डेटा सेंटर हैं जिधर आप सर्वर संसाधन जैसे कि डिस्क स्पेस, बैंडविड्थ, और CPU कोर्स को रेंट कर सकते हैं। इससे आपके खर्चे भी बचेंगे और आपको एक बेहतरीन संसाधन वाला डेटा सेंटर भी मिलेगा।
२. क्लाउड
थर्ड पार्टी की क्लाउड सेवाओं का उपयोग करके, आप क्लाउड में एक वर्चुअल डेटा सेंटर स्थापित कर सकते हैं। यह कोलोकेशन के समान ही है, लेकिन इसमें आप केवल हार्डवेयर रेंट पर लेने और उसे खुद ही कॉन्फ़िगर करने के बजाय अलग सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।
३. एज डेटा सेंटर
एज डेटा सेंटर एक छोटा डेटा सेंटर होता है जो अंतिम उपयोगकर्ता के जितना संभव हो सके उतना निकट होता है। एक विशाल डेटा सेंटर रखने के बजाय, आप कई छोटे डेटा सेंटर रखते हैं ताकि लेटेंसी और लैग को कम किया जा सके। जब IoT इक्विपमेंट्स और कम लेटेंसी वाले डेटा की मांग अधिक होती है, तो संगठन एज कंप्यूटिंग सुविधाओं को तैनात कर रहे हैं।
आज के डिजिटल युग में डेटा सेंटर आधुनिक टेक्नोलॉजी की रीढ़ हैं। यही वे सुरक्षित और शक्तिशाली इंफ्रास्ट्रक्चर हैं जहाँ वेबसाइट, ऍप्लिकेशन, ईमेल, क्लाउड सेवाएँ और बिज़नेस डेटा लगातार स्टोर, प्रोसेस और मैनेज किए जाते हैं। बिना डेटा सेंटर के न तो तेज़ इंटरनेट सेवाएँ संभव हैं और न ही २४x७ डिजिटल अवेलिबिलिटी।
जैसे-जैसे ऑनलाइन बिज़नेस, क्लाउड कंप्यूटिंग और AI का उपयोग बढ़ रहा है, वैसे-वैसे डेटा सेंटर की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होती जा रही है। सही डेटा सेंटर न केवल बेहतर परफॉर्मेंस और सिक्योरिटी सुनिश्चित करता है, बल्कि बिज़नेस को भविष्य के लिए स्केलेबल और भरोसेमंद भी बनाता है। इसलिए, किसी भी डिजिटल पहल की सफलता के पीछे एक मजबूत डेटा सेंटर का होना बेहद ज़रूरी है।
FAQs
१. डेटा सेंटर का क्या काम है?
डेटा सेंटर का मुख्य काम दुनिया भर के डिजिटल डेटा को स्टोर, मैनेज और प्रोसेस करना है। यह वेबसाइटों को होस्ट करता है, ईमेल भेजता है और ऑनलाइन ऐप्स को चलाने के लिए जरूरी कंप्यूटिंग पावर देता है।
२. हमें डेटा सेंटर की जरूरत क्यों होती है?
हमें इसकी जरूरत इसलिए है क्योंकि हमारे फोन या लैपटॉप में इतना स्पेस और पावर नहीं होती कि वे अरबों लोगों का डेटा संभाल सकें। डेटा सेंटर सुनिश्चित करते हैं कि हम दुनिया में कहीं भी हों, हमारा डेटा हमें तुरंत और सुरक्षित मिल सके।
३. डेटा सेंटर को ठंडा रखना क्यों जरूरी है?
हजारों सर्वर जब एक साथ चलते हैं, तो वे अत्यधिक गर्मी (Heat) पैदा करते हैं जो हार्डवेयर को पिघला या खराब कर सकती है। लगातार कूलिंग के बिना सर्वर क्रैश हो सकते हैं, जिससे पूरी दुनिया की इंटरनेट सेवाएं ठप हो सकती हैं।

