OTT प्लेटफॉर्म्स जैसे कि Netflix, Amazon Prime, या फिर Jio Hotstar आज के तारीख में मनोरंजन का एक बेहतरीन साधन बन चुके हैं। जैसे जैसे स्मार्टफोन्स की संख्या बढ़ रही हैं वैसे वैसे OTT प्लेटफॉर्म्स का मार्किट साइज़ भी बढ़ते जा रहा हैं। इंटरनेट की दुनिया में यह प्लेटफॉर्म्स आपको TV का विकल्प प्रदान करते हैं।
OTT में एक चीज़ अच्छी हैं कि TV की तरह इसमें आपको प्रचार नहीं दीखते। साथ ही इसमें आप कई सारे टेलीविज़न शोज के एपिसोड्स देख सकते हैं, जो TV में मुमकिन नहीं हैं। आपको याद होगा कि इसकी अहमियत कोरोनावायरस पैंडेमिक के दौरान कितनी बढ़ गयी थी, और उसके बाद इसका मार्किट बहुत तेज़ी से बढ़ा। यह ब्लॉग आपके बताएगा इस बारे में विस्तार से।
विषयसूची
OTT क्या होता हैं?
OTT प्लेटफॉर्म का मतलब है – Over the Top प्लेटफॉर्म है, जो इंटरनेट के माध्यम से विडियो या अन्य डिजिटल मीडिया संबंधी कंटेंट प्रोवाइड करते है, यह OTT प्लेटफॉर्म ऐसे ऍप्स होते है जो की Google Playstore और iOS पे मिल जाते है | आज के तारीख में हर मीडिया कंपनी के खुद के OTT प्लेटफॉर्म्स हैं। उदाहरण: OTT प्लेटफॉर्म की शुरुआत अमेरिका से हुई थी ओर यह धीरे-धीरे इंडिया में आए , लेकिन अब इसके डिमांड बहुत तेजी से बड़ रही है | इसका उपयोग मुख्य रूप से वीडियो ऑन डिमांड प्लेटफॉर्म्स, ऑडियो स्ट्रीमिंग, आदि के लिए किया जाता है | अच्छी बात यह भी हैं कि आप OTT कंटेंट वेब ब्राउज़र में भी इस्तमाल कर सकते हैं।
OTT प्लेटफॉर्म्स के प्रकार
ट्रांसक्शनल वीडियो ऑन डिमांड (टीवीओडी)
OTT प्लेटफार्म का इस टीवीओडी सर्विस में यह सुविधा दी जाती हैं कि यदि ग्राहक अपने किसी पसंदीदा TV शो या फिल्म को एक बार देखना चाहते हैं, यह इसके ज़रिये वे किराए पर ये देख सकते हैं, या इसे खरीदा भी जा सकता है. उदहारण के लिए Apple iTunes आदि|
सब्सक्रिप्शन वीडियो ऑन डिमांड (एसवीओडी)
अगर कोई वीडियो स्ट्रीमिंग कंटेंट देखना पसंद करते हैं तो उन्हें इसके लिए सब्सक्रिप्शन लेना होता हैं, और इस सब्सक्रिप्शन के लिए उन्हें कुछ भुगतान करने की ज़रूरत होती हैं। बहुत से ऐसे प्लेटफॉर्म हैं जिसमें ग्राहक ओरिजिनल कंटेंट देख सकते हैं. उदहारण के लिए Netflix, Amazon Prime और आदि।
एडवरटाइजिंग वीडियो ऑन डिमांड (एवीओडी)
एडवरटाइजिंग वीडियो ऑन डिमांड प्रकार में आपको OTT ऍप में आप मुफ्त में तो कंटेंट देख सकते हैं लेकिन बीच बीच में कुछ ऐड्स भी चलते हैं। इस OTT सर्विस में विज्ञापन मौजूद होते हैं. इसमें ग्राहक मुफ्त में कंटेंट देख सकते हैं, लेकिन ये कंटेंट देखने के साथ ही उन्हें बीच – बीच में ऐड्स भी देखने पड़ते हैं जोकि कोई भी वीडियो ऐड्स हो सकते हैं|
भारत में OTT की शुरुआत कैसे हुई?
OTT प्लेटफार्म की शुरुआत सबसे पहले अमेरिका में हुई थी लेकिन धीरे धीरे यह भारतीय बाजार में भी अपने पाँव जमाने लगा। OTT प्लेटफार्म भारत में २००८ में शुरुआत हुई थी और इसका श्रेय रिलायंस कंपनी को जाता हैं। उन्होंने तब भारत में सबसे पहला OTT प्लेटफॉर्म Bigflix लॉन्च हुआ जिसे रिलायंस एंटरटेनमेंट ने लॉन्च किया. उसके बाद वर्ष २०१० में Digivive ने NEXG TV नाम से ओटीटी मोबाइल एप लॉन्च किया जिसमें वीडियो ऑन डिमांड के साथ टीवी भी देखा जा सकता था. अब तो भारत में कई तरह के ओटीटी प्लेटफॉर्म्स लॉन्च हो चुके हैं जैसे Netflix, Zee5, Amazon Prime, और बाकी।
OTT के फायदे?
OTT के कई सारे फायदे हैं कि यह आपको सुविधा (कभी भी, कहीं भी देखें), कई सारे कंटेंट, और कंट्रोल (अपनी पसंद का शो, अपनी गति से) देता है, जिसमें कम खर्च और विज्ञापन-मुक्त विकल्प भी शामिल हैं; यह किसी भी डिवाइस पर उपलब्ध है और आपको डाउनलोड करके ऑफलाइन देखने की आजादी भी देता है.

– कनेक्टिविटी
OTT प्लेटफॉर्म का उपयोग करना बेहद आसान है और इसके लिए कुछ ही चीज़ों की आवश्यकता होती है, जैसे कि एक मजबूत इंटरनेट कनेक्शन, स्मार्ट टीवी या फोन जैसा कोई देखने का डिवाइस आदि। नेटवर्क प्रोवाइडर आपसे मासिक शुल्क के बदले इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान करता है और दर्शक अपनी ज़रूरत के अनुसार इंटरनेट पैकेज या प्लान चुन सकते हैं।
– काम कीमत
इंटरनेट का उपयोग घर से काम करने, लाइव वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन क्लासेस, फिल्में देखने, सोशल मीडिया का उपयोग करने आदि जैसे अलग अलग तरीकों से किया जाता है। लेकिन इंटरनेट उपयोग की कीमत चुने गए नेटवर्क प्रोवाइडर या देखी जा रही कंटेंट पर निर्भर नहीं करती हैं। OTT की कीमत चुने गए इंटरनेट डेटा पैकेज और देखे जा रहे OTT प्लेटफॉर्म के लिए सब्सक्रिप्शन चार्ज (यदि कोई हो) पर आधारित होती है।
– सुविधा
जैसे कि आप जानते हैं इंटरनेट हर जगह आप एक्सेस कर सकते हैं वो भी किसी डिवाइस से। इस वजह से आप OTT प्लेटफॉर्म्स भी इस्तमाल कर सकते हैं। वहीँ दूसरी ओर केबल नेटवर्क वाले चैनल्स हर जगह शायद न चले। इसी आज़ादी की वजह से OTT ऑफरिंग्स काफी पसंदीदा होती हैं। आज के तारीख में आप क्षेत्रीय भाषा में OTT कंटेंट आप एक्सेस कर सकते हैं।
– तमाम तरीके के कंटेंट
पारंपरिक तौर पर आप केबल TV में कुछ चुनिंदा चैनल्स ही रखते थे जिसकी वजह से आप हर प्रकार का कंटेंट नहीं देख सकते हैं। क्यूंकि उसमे हर उम्र के हिसाब से कंटेंट नहीं मिलता। इस प्रकार ऑडियंस को चैनल चयन, कंटेंट के प्रकार, क्वालिटी और विविधता के मामले में कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है। ओटीटी प्लेटफॉर्म व्यापक स्तर पर कंटेंट उपलब्ध कराते हैं, जिनमें से अधिकतर सशुल्क सामग्री के साथ-साथ मुफ्त कंटेंट भी प्रदान करते हैं। सदस्यता लेने से दर्शक प्राइम मेंबर बन सकते हैं; हालांकि, OTT प्लेटफॉर्म की सदस्यता लिए बिना भी दर्शक लगभग असीमित कंटेंट देख सकते हैं।
– माइक्रो-टारगेटिंग
विज्ञापन कम्पैनस का मूल उद्देश्य सही टार्गेटेड ऑडियंस सेगमेंट का पता लगाना और उनकी इंटरेस्ट के अनुरूप कंटेंट प्रस्तुत करना है। बेहतर डेटा एनालिसिस की मदद से, OTT प्लेटफॉर्म एडवेर्टाइज़र्स को यह समझने का लाभ प्रदान करते हैं कि उनके ऑडियंस कौन हैं, उन्हें क्या चाहिए और उनकी इंटरेस्ट को कैसे पूरा किया जा सकता है ताकि सेल्स को बढ़ाया जा सके। इस प्रकार माइक्रो-टारगेटिंग आसान हो जाता है और ग्राहक के साथ जुड़ाव भी बढ़ता है। एडवेर्टाइज़र्स अपने संदेश को और भी सही तरीके से पहुंचा सकते हैं।
OTT (Over-The-Top) प्लेटफॉर्म ने मनोरंजन की दुनिया को पूरी तरह बदल दिया है। अब दर्शक अपनी पसंद की फिल्में, वेब सीरीज, लाइव स्पोर्ट्स और टीवी शोज़ कभी भी और कहीं भी मोबाइल, लैपटॉप या स्मार्ट टीवी पर आसानी से देख सकते हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कंटेंट देखने के लिए किसी केबल या डिश कनेक्शन की जरूरत नहीं होती, केवल इंटरनेट कनेक्शन होना काफी है।
आज के डिजिटल युग में OTT सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि एक नई मीडिया क्रांति बन चुका है। इसमें हर उम्र और हर रुचि के लोगों के लिए अलग-अलग भाषा और कैटेगरी में कंटेंट उपलब्ध होता है। आने वाले समय में OTT का उपयोग और भी बढ़ेगा, क्योंकि यह सुविधाजनक, किफायती और पर्सनलाइज्ड एंटरटेनमेंट का सबसे बेहतर विकल्प बनकर उभरा है।
FAQs
१. OTT और टीवी (Cable/DTH) में मुख्य अंतर क्या है?
टीवी पर आपको चैनल के हिसाब से तय समय पर प्रोग्राम देखने होते हैं, जबकि OTT पर आप अपनी पसंद का कंटेंट (फिल्में, सीरीज) कभी भी और कहीं भी देख सकते हैं। टीवी सिग्नल के लिए डिश या केबल की जरूरत होती है, जबकि OTT पूरी तरह इंटरनेट पर चलता है।
२. क्या OTT देखने के लिए बहुत ज्यादा इंटरनेट की जरूरत होती है?
यह आपकी वीडियो क्वालिटी पर निर्भर करता है; HD में 1 घंटा देखने पर लगभग 1GB से 3GB डेटा खर्च हो सकता है। अगर आपके पास वाई-फाई (Broadband) है तो डेटा की चिंता नहीं रहती, लेकिन मोबाइल डेटा पर यह जल्दी खत्म हो सकता है।
३. सबसे सस्ता OTT सब्सक्रिप्शन कैसे प्राप्त करें?
सस्ता सब्सक्रिप्शन लेने के लिए टेलीकॉम कंपनियों (Airtel, Jio) के रिचार्ज प्लान चुनें जिनमें OTT फ्री मिलता है, या “OTT Play” जैसे एग्रीगेटर ऐप्स का इस्तेमाल करें। साथ ही, सालाना प्लान लेना महीने-दर-महीने के मुकाबले काफी किफायती पड़ता है।
४. क्या एक ही सब्सक्रिप्शन को कई लोग इस्तेमाल कर सकते हैं?
हाँ, अधिकांश OTT प्लेटफॉर्म्स एक ही अकाउंट से मल्टीपल प्रोफाइल बनाने की सुविधा देते हैं, लेकिन एक साथ देखने (Simultaneous Screens) की संख्या प्लान के हिसाब से सीमित होती है। मोबाइल-ओनली प्लान आमतौर पर सिर्फ एक ही स्क्रीन पर चलते हैं।

